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झूठन, कच्ची सब्जियों के वेस्ट को घर में ही खाद के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है.
पाल्यूशन टू साल्यूशन विषय पर वर्कशॉप
इंदौर, 26 जुलाईं. साईंस एवं इंजीनियरींग रिसर्च बोर्ड, विज्ञान और तकनीकि विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित आई.ई.एस., आई.पी.एस. एकेडमी के केमिकल इंजीनियरींग डिपार्टमेंट में पाल्यूशन टू साल्यूशन विषय पर आधारित पांच दिवसीय नेशनल वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है.
वर्कशॉप का उद्देश्य पर्यावरण के क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के नवीन आयामों तथा प्रारूपों को विद्यार्थियों और समाज के समक्ष प्रकाशित करना है तथा पर्यावरण प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निरंतर विकास के लिये हुई आधुनिक तकनीकि से रुबरु करना है. इस वर्कशॉप में सभी इंजीनियरींग कॉलेजों के व्याख्याताओं और विर्द्यार्थयों को आमंत्रित किया गया है.
वर्कशॉप के मुख्य अतिथि के रूप में सीव्ज एन्वायरमेन्टल कन्सलटेन्सी इन्दौर के भूपेन्द्रजी गिरी ने वेस्ट वाटर ट्रीटमेन्ट के बारे में बताया कि किस तरह वाटर ट्रीटमेन्ट आज के समय की जरूरत है तथा हर इण्डस्ट्री को अब आवश्यक रूप से इस ट्रीटमेन्ट प्रोसेस को अपने उद्योग क्षेत्र में स्थापित करना ही होगा.
श्री गिरी ने इसके अलावा बताया कि छोटे-छोटे उपायों के द्वारा हम अपषिष्ट प्रबंधन कर सकते है. घरों से निकलने वाले कचरे जैसे- झूठन, कच्ची सब्जियों का वेस्ट आदि को घर में ही खाद के रूप में परिवर्तीत किया जा सकता है.
समान्यत: बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को खाद में परिवर्तित होने के लिए दो से तीन महीने का समय लगता है, पर अब ऐसे कई प्रकार के जीवाणु उपलब्ध है जो इस बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को 15 से 20 दिनों में खाद के रूप में परिवर्तित कर सकता है. इस खाद को विभिन्न उपयोगों में लाया जा सकता है.
चूना, फिटकरी से पौधे कर सकते हैं विकसित
अगले सत्र में विपुल जैन ने घरेलु वेस्टवाटर के बारें में बताया एवं किस तरह आसानी से उपलब्ध होने वाले केमिकल जैसे- चूना, फिटकरी को उपयोग कर उसे उद्यानों मे पेड़ पौधो को विकसित करने हेतु पुन: उपयोग में लाया जा सकता है. इसे विस्तार से सभी प्रतिभागियों को समझाया.
उद्घाटन समारोह की शुरूआत आई.पी.एस. एकेडमी परिवार के अध्यक्ष आर्किटेक्ट अचल चौधरी द्वारा सभी प्रतिभागीयों को अभिवादन प्रेषित किया. समारोह के समापन के समय प्राचार्य श्रीमति डॉ. अर्चना कीर्ति चौधरी ने वर्कशॉप के बारे में विस्तार से बताया. केमिकल इंजीनियरींग विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार कौशल ने आभार माना.


